Gajar ki kheti:गाजर की खेती कौन से समय मे करे

नमस्कार दोस्तों आप सभीका हमारे लेख मे स्वागत है हम आपके लिए हररोज नइ जानकारी लेके आते रहते है उसमे आपको हम खेती और खेती की योजना और खेती मे नइ टेक्निक और टिप्स लेके आते रहेता है आज हम आपको गाजर की खेती की जानकारी देंगे उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और बिहार में गाजर का व्यापक उत्पादन होता है। 15–30 डिग्री सेल्सियस तापमान के लाभ के कारण गाजर के ऊपर रंग हल्का बना रहेने मे मदद करता है 

सर्दियों में गाजर का बहुत से लोग खाते हैं। यह प्रतिरक्षा से भरपूर है। इनका उपयोग कच्चा और सब्जी दोनों में किया जाता है। गाजर, जो विटामिन ए से भरपूर है, आंखों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी है। इसमें पाए जाने वाली कैरोटिन बालों के लिए बेहतरीन है। इसे खाने से पाचन भी अच्छा होता है।

गाजर की उनत्त किस्मे

चैटनी

यह एक यूरोपीय गाजर किस्म है। इस किस्म की गाजरें मोटी होती हैं और गहरे लाल रंग की होती हैं। बोने के 75 से 90 दिनों बाद यह किस्म तैयार होती है। इस किस्म का बीज खेत में बनाया जा सकता है। यह प्रति हेक्टेयर 150 क्विंटल उत्पादन देता है।

नैनटिस

ये यूरोपीय गाजर भी है। हरी पत्तियों वाला छोटा उपरी भाग इस किस्म की विशेषता है। इस किस्म की जड़ें गोल और नारंगी होती हैं। जिनके अगले सिरे का आकार छोटा और पतला होता है यह मीठी, दानेदार और सुगंधित मुलायल है। बीज बोने के 110 से 120 दिनों बाद यह किस्म तैयार हो जाती है। मैदानी क्षेत्रों में इसका बीज नहीं बनाया जा सकता। प्रति हेक्टेयर यह 200 क्विंटल उत्पादन देता है।

चयन नं 223

नैनटिस के समान गुणों वाली यूरोपियन किस्म भी एशियाई है। यह फसल बोने के ९० दिन बाद तैयार हो जाती है और ९० दिनों तक खेत में अच्छी हालत में रहती है। नारंगी रंग की मीठी जड़ें 15 से 18 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। देर से भी इसे बोया जा सकता है। यह प्रति हेक्टेयर 200 से 300 क्विंटल की फसल देता है।

पूसा रुधिर

यह लाल और लंबी है। यह 280 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देता है।

पूसा मेगानी

इसकी जड़े गोलाकार, लंबी, नारंगी रंग की गूदी होती है, जिसमें अधिक कैरोटीन होता है। यह अगस्त से सितंबर तक लगाया जा सकता है और अक्टूबर से नवंबर तक लगाया जा सकता है। बोने के 100 से 110 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है। 250 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर इसकी उत्पादकता होती है।

पूसा जमदग्री

85 से 130 दिनों में इस किस्म की जड़ें देश भर में तैयार हो जाती हैं। हरी पत्तियों वाली उपरी मंझौली है। इसका मध्य भाग और गुदा केसरिया रंग का होता है और इसका स्वाद मीठा, कोमल और उत्तम है। यह किस्म तेजी से बढ़ती है और अधिक उत्पादन देती है।

गाजार की खेत मे ध्यान रखने वाली बाबाते

  • गाजर की खेती करने वाले किसानों को अगस्त से सितंबर तक एशियाई किस्मों और अक्टूबर से नवंबर तक यूरोपियन किस्मों की बुवाई करनी चाहिए।
  • 12 से 21 डिग्री का तापमान गाजर की खेती के लिए अच्छा रहता है।
  • गाजर की बुवाई के लिए 10 से 12 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टेयर की आवश्यकता होती है।
  • गाजर की बुवाई के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, लेकिन आजकल इसकी खेती अन्य स्थानों पर भी की जाती है।
  • गाजर की फोर्किग (गाठ पंजा) की समस्या भारी भूमि या सख्त नीचे की भूमि में हो सकती है।
  • गाजर उचित समय पर बोनी चाहिए। पूर्व बिजाई करने पर अंकुरण की समस्या आती है, गाजर की गांठ बनती है, जड़ से कई जड़े निकल जाती हैं, झंडे निकल जाते हैं और गाजर सफेद रह सकती है।
  • बिजाई को हल्की डोलियों पर करना चाहिए ताकि अच्छी पैदावार और जड़ों की गुणवत्ता मिल सके।
  • ज्यादा पानी देने से गाजर में रेशे बनने लगते हैं और गाजर सफेद रहती है, जो गाजर की गुणवत्ता और उपज को कमजोर करता है।
  • गाजर की आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। देर से गाजर में पानी डालने से गाजर फटने लगती है, जो उनकी गुणवत्ता को खराब करता है।
  • देर से खुदाई करने से गाजर का पोषण कम होता है। गाजर पतली हो जाती है और उसका वजन कम हो जाता है। गाजर पककर तैयार होते ही खुदाई करनी चाहिए।

गाजर के लिए खेत तैयार करना

बिजाई से पहले खेत को पूरी तरह से समतल करना चाहिए। इसके लिए खेत को 2 से 3 इंच गहरा करना होगा। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा लगाएं, ताकि ढेले टूट जाएं और जमीन भुरभुरी हो जाए। इसके बाद गोबर की खाद को खेत में अच्छी तरह मिलाएं।

गाजर बुआई करने का तरीका

बिजाई को हल्की डोलियों पर करना चाहिए ताकि अच्छी पैदावार और जड़ों की गुणवत्ता मिल सके। डोलियों से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और पौधे से 6 से 8 सेंटीमीटर होनी चाहिए। दो से तीन सेंटीमीटर गहरी नाली बनाकर बीज बोना चाहिए।

गाजर मे खाद एवं उर्वरक की मात्रा

खेत की तैयारी के दौरान, प्रति हैक्टेयर 20 से 25 टन गोबर की सड़ी खाद डालनी चाहिए। बिजाई के दौरान हर हैक्टेयर में २० किलोग्राम शुद्ध नाइट्रोजन, २० किलोग्राम फास्फोरस और २० किलोग्राम पोटाश डालना चाहिए। 20 किलोग्राम नाइट्रोजन को खड़ी फसल में 3 से 4 सप्ताह बाद मिट्टी चढ़ाते समय देना चाहिए।

गाजर की खेत मे सिंचाई

गाजर की फसल को पांच से छह बार सिंचाई करनी चाहिए। खेत में खेती करते समय कम नमी होने पर पहली सिंचाई करनी चाहिए। पानी की डोलियों से ऊपर नहीं जाना चाहिए; सिंचाई हर 15 से 20 दिन में आवश्यकतानुसार करनी चाहिए।

गाजर की खेत में खपतवार नियंत्रण

खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए, बुवाई के चार सप्ताह बाद दो से तीन बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इसके बाद मिश्रण करना चाहिए। 30 EC 3 kg पेंडीमेथिलीन को 900 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर 48 घंटे के अंदर छिडक़ाव किया जा सकता है अगर खेत में अधिक खरपतवार उगते हैं।

गजार की खेत मे गुड़ाई और पैदावार

खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए, बुवाई के चार सप्ताह बाद दो से तीन बार निराई करनी चाहिए। इसके बाद सामग्री को मिलाना चाहिए। अगर खेत में अधिक खरपतवार उगते हैं तो 30 EC को 900 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर 48 घंटे के अंदर छिडक़ाव किया जा सकता है।

सारांश

हमने आपको इस लेख के अंदर आपको गाजर की खेती के बारे मे बताया हुआ है इस लिए आप इस लेख को जरुर पढ़े और पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेर करे

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