kharbuja ki kheti,खरबूजा की दवा,खरबूजा की खेती का समय

kharbuja ki kheti,खरबूजा की दवा,खरबूजा की खेती का समय:-नमस्कार दोस्तों आप साभिका हमारे लेख मे स्वागत है हम आपके लिए हर रोज नई जानकारी लेके आते रहते है जिसके अंदर आपको हम खेती के बारेमे जानकारी और खेती की जानकारी लेके आते रहते है आज हम आपको खरबूजे की खेती की खेती कैसे करे उसके बारे मे सही और सभी जानकारी ड़े रखि है तो इस लेख को ध्यान से पूरा पढे 

खरबूजा की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु 

किसान भाई आप खारबूजा की खेती हर तरीके की मिट्टी के अंदर कर सकते है लेकिन इसके लिए हम बहोत बढ़िया मिट्टी की बात करे तो रेतीली चिकनी दोमट ये मिट्टी इसके लिए बहोत बढ़िया है इसके कारण इस मिट्टी के अंदर इसका ज्यादा उत्पादन होता है उसके अलावा इसकी खेती के लिए गरम और सूके मौसम की जरूरत होती है 

खरबूजे की खेती के लिए खेत तैयारी

किसान भाई आपको खरबूजे की खेती के लिए आपको सबसे पहले अपने खेत की तीन से चार जुताई कर लेनी चाइए उसके बाद आपको 150 से 200 क्विंटल गोबर की खाद डालनी चाइए उसके बाद आपको दोबारा से जुटाई कर लेनी चाइए उसके बाद आपको पाटा लगाके जमीन को समतल बना लेना चाइए उसके क्यारिया बना लेना चाइए जब आप क्यारिया या फिर आप बेड बनाने के लिए जाते हो तो आपको 10 kg यूरिया,10 kg dap,10 kg मेग्नेशियम ये रासायनिक खाद डालनी चाइए 

खरबूजे की उन्नत किसमे

खरबूजे की खेती के लिए विभिन्न किस्में हैं, जो अलग-अलग विशेषताओं और गुणधर्मों के साथ आती हैं। यहां कुछ प्रमुख खरबूजे की किस्में और उनकी विशेषताएं हैं

पूसा शरबती (एस-445)

   – फल गोल, मध्यम आकार, और छिलका हल्के गुलाबी रंग का होता है।

   – छिलका जालीदार होता है, गूदा मोटा और नारंगी रंग का होता है।

   – एक बेल पर 3-4 फल लगते हैं।

पूसा मधुरस

   – फल गोल, चपटे, और गहरे हरे रंग के धारीयुक्त होते हैं।

   – गूदा रस से भरा हुआ होता है और नारंगी रंग का होता है।

   – फल का औसत वजन 700 ग्राम होता है और एक बेल पर 5 फल तक लगते हैं।

हरा मधु

   – फल का औसत भार एक किलो होता है और फलों पर हरे रंग की धारियां पाई जाती हैं।

   – फल पकने पर हल्के पीले पड़ जाते हैं।

   – गूदा हल्का हरा, 2-3 सेमी मोटा और रसीला होता है।

आई.वी.एम.एम.3

   – फल धारीदार और पकने पर हल्के पीले रंग के होते हैं।

   – फल काफी मीठा होता है और गूदा नारंगी रंग का होता है।

   – फल का औसत वजन 500 से 600 ग्राम होता है।

पंजाब सुनहरी

   – लता मध्यम लंबाई की होती है, फल गोलाकार और पकने पर हल्का पीले रंग का होता है।

   – गूदा नारंगी रंग का तथा रसदार होता है।

इसके अलावा, खरबूजे की कई और उन्नत प्रजातियाँ हैं, जैसे कि दुर्गापुरा मधु, एम-4, स्वर्ण, एम. एच. 10, हिसार मधुर सोना, नरेंद्र खरबूजा 1, एम एच 51, पूसा मधुरस, अर्को जीत, पंजाब हाइब्रिड, पंजाब एम. 3, आर. एन. 50, एम. एच. वाई. 5 और पूसा रसराज आदि।

खरबूजा की खेती का समय 

खरबूजे की खेती के लिए हल्की रेतीली बालूई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती के लिए भूमि को उचित जल निकास वाली होनी चाहिए, क्योंकि जलभराव की स्थिति में इसके पौधों पर अधिक रोग प्राप्त हो सकते हैं। इसकी खेती में भूमि का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। जायदा मौसम खरबूज की फसल के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इस दौरान पौधों को पर्याप्त मात्रा में गर्म और आद्र जलवायु प्राप्त होती है।

इसके बीजों को अंकुरित होने के लिए आरंभ में 25 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, और पौधों के सही विकास के लिए 35 से 40 डिग्री तापमान अत्यंत आवश्यक है।

खरबूजे की खेती मे पैदावार 

एक हेक्टेयर खरबूज की खेती में लगने वाला खर्च लगभग 1,000 रुपये होता है। इसमें शामिल होते हैं बीजों का खरीद (तकरीबन 3 से 5 किलोग्राम बीज के लिए लगभग 3,000 रुपये), खेत की तैयारी, रोपाई, और खाद के लिए खर्च (लगभग 6,000 रुपये), तथा तुड़ाई पर मजदूरी के लिए खर्च (लगभग 3,000 रुपये), और कीटनाशकों का उपयोग (लगभग 13,000 रुपये)। 

फसल की तैयारी और रोपाई के बाद, खरबूज की पूरी फसल को 90 से 95 दिनों के बाद तैयार हो जाती है। फल अंतिम छोर से पकना शुरू होता है, जिससे फल का रंग बदल जाता है और इस दौरान तुड़ाई की जाती है। 

एक हेक्टेयर के खेत में तकरीबन 200 से 250 क्विंटल का उत्पादन होता है। खरबूज का बाजार भाव 15 से 20 रुपए प्रति किलो होता है, जिससे किसान एक बार की फसल से 3 से 4 लाख रुपए की कमाई कर सकते हैं।

सारांश:-

किसान भाई हमने आपको  हमारे लेख के अंदर बताया है की आप खरबूजे की खेती करके किसान कैसे पैसे कमा सकते है जिसके लिए सभी जानकारी दी है तो अपने दूसरे किसान के साथ जरूर शेर करे और एसी जानकारी पाने के लिए हमारे ग्रुप मे जुड़े 

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